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शुक्रवार, 19 जून 2026

अष्ट सिद्धियां


 हनुमान चालीसा में एक लाइन आती है—"अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता"? क्या आप जानते हैं, ये अष्ट सिद्धियां असल में हैं क्या? क्या कोई इंसान सच में हवा में उड़ सकता है या चींटी जितना छोटा हो सकता है? आज के इस वीडियो में हम इन 8 चमत्कारी सुपरपावर्स का सच जानेंगे।

क्या हैं अष्ट सिद्धियां?

सरल शब्दों में कहें तो अष्ट सिद्धियां आठ ऐसी दिव्य शक्तियां हैं, जिन्हें पाने के बाद इंसान प्रकृति के नियमों से ऊपर उठ जाता है। वह जब चाहे अपना रूप, आकार और वजन बदल सकता है। चलिए, इन्हें हमारे इतिहास और पुराणों के कुछ दिलचस्प उदाहरणों के साथ समझते हैं।


1. अणिमा (Anima) – सबसे छोटा होने की शक्ति

पहली सिद्धि है अणिमा। इसका मतलब है अपने शरीर को एक एटम यानी अणु से भी छोटा बना लेना।

रामायण का उदाहरण: हनुमान जी ने लंका में प्रवेश करते समय इसी शक्ति से खुद को एक मच्छर जितना छोटा बना लिया था ताकि वो बिना किसी की नजर में आए पूरी लंका की खोज कर सकें।

अन्य पौराणिक उदाहरण: भगवान विष्णु ने जब 'वामन अवतार' लिया था, तब राजा बलि के सामने वो एक बेहद छोटे कद के ब्राह्मण के रूप में प्रकट हुए थे।

2. महिमा (Mahima) – विशालकाय होने की शक्ति

यह अणिमा के बिल्कुल उलट है। इस शक्ति से साधक अपने शरीर को जितना चाहे बड़ा और असीमित बना सकता है।

रामायण का उदाहरण: जब हनुमान जी समंदर पार कर रहे थे और सुरसा नाम की राक्षसी उनका रास्ता रोक रही थी, तब उन्होंने इसी महिमा सिद्धि का इस्तेमाल करके अपना आकार कई योजन बड़ा कर लिया था।

अन्य पौराणिक उदाहरण: जब भगवान श्री कृष्ण ने कुरुक्षेत्र के मैदान में अर्जुन को अपना 'विराट रूप' दिखाया था, जिसमें पूरा ब्रह्मांड समाया हुआ था, वह महिमा सिद्धि की चरम सीमा थी।

3. गरिमा (Garima) – असीमित वजन

इस सिद्धि में शरीर का साइज तो नॉर्मल रहता है, लेकिन उसका वजन यानी वेट इतना बढ़ जाता है कि दुनिया की कोई भी ताकत उसे हिला नहीं सकती।

रामायण का उदाहरण: जब अंगद रावण की सभा में गए, तो उन्होंने अपना पैर जमीन पर जमा दिया था। रावण के बड़े-बड़े योद्धा और खुद रावण भी उनका पैर नहीं हिला पाया। यह गरिमा सिद्धि का ही एक रूप था।

अन्य पौराणिक उदाहरण: महाभारत का वो किस्सा जब भीम को अपनी ताकत पर घमंड हो गया था। तब हनुमान जी ने एक बूढ़े वानर का रूप धरकर अपनी पूंछ जमीन पर रख दी थी। महाबली भीम अपनी पूरी ताकत लगाने के बाद भी उस पूंछ को टस से मस नहीं कर पाए थे।

4. लघिमा (Laghima) – हवा से भी हल्का होना

इस शक्ति को पाने के बाद शरीर का वजन बिल्कुल जीरो हो जाता है। इंसान एक रुई के फाहे से भी हल्का हो जाता है और हवा से भी तेज गति से उड़ सकता है।

रामायण का उदाहरण: जब हनुमान जी लक्ष्मण जी के प्राण बचाने के लिए पूरा द्रोणागिरी पर्वत उठा कर लंका ले जा रहे थे, तब उन्होंने पर्वत के भार को अपने लिए शून्य करने और तेजी से उड़ने के लिए लघिमा सिद्धि का प्रयोग किया था।

अन्य पौराणिक उदाहरण: देवर्षि नारद मुनिका नाम तो आपने सुना ही होगा। वो बिना किसी विमान या साधन के, नारायण-नारायण बोलते हुए पल भर में एक लोक से दूसरे लोक में तैरते हुए चले जाते हैं। यह लघिमा सिद्धि के कारण ही संभव है।

5. प्राप्ति (Prapti) – कहीं भी आने-जाने की छूट

इस सिद्धि से साधक के लिए कोई दीवार, ताला या सरहद मायने नहीं रखती। वह पलक झपकते ही किसी भी जगह पहुंच सकता है और पशु-पक्षियों की भाषा भी समझ सकता है।

रामायण का उदाहरण: माता सीता की खोज के समय जब हनुमान जी लंका के अंतःपुर (महलों) में घूम रहे थे, तब वे इसी सिद्धि के प्रभाव से अदृश्य होकर हर जगह पहुंच पा रहे थे।

अन्य पौराणिक उदाहरण: महाभारत काल में महर्षि वेदव्यास के पास यह शक्ति थी। जब भी धृतराष्ट्र या गांधारी को उनकी जरूरत होती थी, वे बस उनका स्मरण करते थे और व्यास जी तुरंत वहां प्रकट हो जाते थे।

6. प्राकाम्य (Prakamya) – माइंड रीडिंग और इच्छा पूर्ति की पावर

यह आज के समय की सबसे डिमांडिंग पावर है—यानी दूसरों के मन की बात जान लेना और पानी पर चलना या हवा में लंबे समय तक टिके रहना।

रामायण का उदाहरण: जब हनुमान जी पहली बार श्री राम और लक्ष्मण से ऋष्यमूक पर्वत पर मिले, तो वे ब्राह्मण के रूप में आए थे। उन्होंने तुरंत पहचान लिया था कि ये दोनों कोई साधारण मानव नहीं बल्कि स्वयं भगवान हैं।

अन्य पौराणिक उदाहरण: कथाओं के अनुसार, महान गुरु शंकराचार्य ने इस सिद्धि के बल पर 'परकाया प्रवेश' किया था, यानी वे अपने शरीर को छोड़कर दूसरे के शरीर में प्रवेश कर गए थे ताकि उनके जीवन के अनुभवों को समझ सकें।

7. ईशत्व (Ishatva) – भगवान जैसी शक्ति

'ईशत्व' शब्द ईश्वर से बना है। इसे पाने के बाद साधक प्रकृति के पंच तत्वों (अग्नि, वायु, जल, पृथ्वी, आकाश) को कंट्रोल कर सकता है।

रामायण का उदाहरण: मेघनाद (इंद्रजीत) के पास कुछ ऐसी ही तामसिक सिद्धियां थीं, जिससे वह युद्ध के मैदान में अचानक गायब हो जाता था, पत्थरों और आग की बारिश करवा देता था।

अन्य पौराणिक उदाहरण: देवराज इंद्र जब ब्रजमंडल पर मूसलाधार बारिश करवा रहे थे, तब भगवान कृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर प्रकृति के उस प्रकोप को थाम दिया था।

8. वशित्व (Vashitva) – किसी को भी वश में करना

यह आखिरी शक्ति है। इसके जरिए साधक किसी भी इंसान, जानवर या प्रकृति की क्रूर शक्ति को पूरी तरह अपने कंट्रोल में कर सकता है।

रामायण का उदाहरण: लंका के राजा रावण ने अपनी घोर तपस्या और सिद्धियों के बल पर सभी नौ ग्रहों (शनिवार, राहु, केतु आदि) को अपने वश में कर लिया था और उन्हें अपने सिंहासन की सीढ़ियों की तरह इस्तेमाल करता था।

अन्य पौराणिक उदाहरण: ऋषि-मुनियों के आश्रमों के उदाहरण मिलते हैं, जहां उनकी वशित्व सिद्धि और तपोबल के कारण शेर और हिरण जैसे जन्मजात दुश्मन भी एक ही घाट पर बिना किसी डर के पानी पिया करते थे।

तो दोस्तों, ये थीं वो 8 दिव्य शक्तियां और हमारे इतिहास से जुड़े उनके हैरान कर देने वाले उदाहरण। अगर आपको इन शक्तियों में से कोई एक शक्ति चुनने का मौका मिले, तो आप कौन सी चुनेंगे? कमेंट सेक्शन में जरूर बताइए! वीडियो पसंद आया हो तो लाइक, शेयर और चैनल को सब्सक्राइब करना मत भूलना। मिलते हैं अगले वीडियो में, तब तक के लिए नमस्कार!

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